Posts

Showing posts from May, 2020

व्रत करना गीतानुसार कैसा है?

Image
     💠गीता में व्रत के विषय में 💠  भारत की अधिकांश जनता भक्ति,साधना और भगवान में विश्वास रखने वाली है साधक समाज भगवान से सभी प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के व्रत किया करता है  ❇ परंतु कभी-कभी साधक समाज के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या व्रत करना सही है या गलत ❓❓ प्रश्न :- क्या एकादशी, कृष्ण अष्टमी या अन्य व्रत भी शास्त्रों में वर्जित हैं❓   उत्तर -श्रीमद्भगवत् गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में मना किया है कि हे अर्जुन! यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् यह भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न अधिक सोने वाले की तथा न अधिक जागने वाले की सफल होती है। इस श्लोक में व्रत रखना पूर्ण रुप से मना है। सूक्ष्मवेद में कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि :- गुरूवाँ गाम बिगाड़े संतो, गुरूवाँ गाम बिगाड़े। ऐसे कर्म जीव कै ला दिए, बहुर झड़ैं नहीं झाड़े ।। शब्दार्थ :- परमेश्वर कबीर जी ने समझाया है कि तत्वज्ञानहीन गुरूओं ने गाँव के गाँव को शास्त्राविरूद्ध साधना पर लगाकर उनका जीवन नाश कर रखा है।भोली जनता को शास्त्रा विरूद्ध ...

मूर्ति पूजा क्या है

Image
             💠 मूर्ति पूजा क्या है? 💠 मूर्ति पूजा के अंतर्गत अंध श्रद्धालुओं को कई प्रावधान बताए गए हैं :-👇🏻 श्री विष्णु जी, श्री शिव जी, श्री देवी दुर्गा माता जी, श्री गणेश जी, श्रीलक्ष्मी जी, श्री पार्वती जी तथा अन्य लोक प्रसिद्ध देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूजा यानि उनको प्रतिदिन स्नान करवाना, नए वस्त्रा पहनाना, तिलक लगाना, उन पर फूल चढ़ाना, अच्छा भोजन बनाकर उनके मुख को भोजन लगाकर भोजन खाने की प्रार्थना करना। दूध पिलाना, अगरबत्ती व ज्योति जलाकर उनकी आरती उतारना। उनसे अपने परिवार में सुख-शांति, समृद्धि के लिए प्रार्थना करना। नौकरी-रोजगार,संतान व धन प्राप्ति के लिए अर्ज करना आदि-आदि तथा शिव जी के लिंग (च्तपअंजम च्ंतज) यानि गुप्तांग की पूजा करना। उस लिंग पर दूध डालना,  यह मूर्ति पूजा है।    श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 16 श्लोक 23.24 में स्पष्ट निर्देश है कि जो साधक शास्त्रों में वर्णित भक्ति की क्रियाओं के अतिरिक्त साधना व क्रियाऐं करते हैं, उनको न सुख की प्राप्ति होती है, न सिद्धि यानि आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है, ...